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चलते रहने का नाम ही जीवन है

कभी कभी हमारी जिंदगी ऐसी मोड़ पर आकर ठहर जाती है और  हमें लगने लगता है की सब कुछ थम सी गयी है रुक सी गयी है , चेहरे पर उदासी हो जाती है दिमाग सोचने लगता है की यार क्या हो गया  मेरे साथ इतने अच्छे भले तो  थे हम, न जाने कब उदासी अपनी चादर में हमे लपेट ली और न जाने कितने दिन इस चादर में हमें और  लिपटा रहना पड़ेगा, सच है यार जब से हम बड़े हुए है तब से जिंदगी जीने का मायने ही बदल गया, अब न बेफिक्री रही न वो दिन रहे न वो शामे रही जहाँ हम जिंदगी के बड़े बड़े दुःख को यु भूल जाया करते थे , और अब सोचते है यार ये न किया तो जिन्दा कैसे रहेंगे जीवन को कैसे जियेंगे,   न जाने किन किन सोचे से घिरे हुए है आज हम , कभी कभी तो मन करता है यार यही जिंदगी है तो मर क्यों न जाऊ मै, इतना दर्द कैसे सहेंगे हम, फिर सोचते है बाकी लोगो  के भी जिंदगी में यही तो है सभी संघर्ष  करते है और मैंने बचपन में भी सुना था की  बिना संघर्ष कोई महान नहीं बनता, लेकिन यार सिर्फ संघर्ष ही जीवन में सफलता नहीं दिला सकता  संघर्ष के साथ भी बहोत कुछ है , लेकिन  साथी इसके बावजूद भी जीवन में कई कठिनाइयां है , जब हम छोटे थे तो हम सारे भाई माँ बाप के साथ बैठकर खाना भी खा लेते थे खेल भी लिया करते थे बाते भी कर लिया करते थे खूब सारी, लेकिन जब हम बड़े हुए हम सभी कितने दूर हो गए  उसकी कसक हमारे दिलो  को मरोड़ती है की जो साथी थे वही दूर हो गए हम अब जीवन में कैसे सफल हो पाएंगे 

दिल हार सा जाता है यार ये जिंदगी की भागमभाग में थक गया हु लोगो को समझते-समझते और समझाते-समझाते लेकिन क्या करू बस  चलते रहने का नाम ही जीवन है। 









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